Home व्यक्तित्व वर्नीगाड में सोवेन्द्र गुरूजी के जजबे को बयां कर रहा लहराता जंगल

वर्नीगाड में सोवेन्द्र गुरूजी के जजबे को बयां कर रहा लहराता जंगल

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पर्यावरण संरक्षण की अलख जगी तो छात्रों के साथ ग्रामीण भी बने सहयोगी :

दिलीप कुमार :
छात्रों को शिक्षा का ज्ञान बांटने के साथ ही राजकीय इंटर काॅलेज वर्नीगाड में भूगोल के प्रवक्ता सोवेन्द्र सिंह ने क्षेत्रवासियों को हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर एक मिसाल कायम की है। कई साल पहले उनके लगाये पौधे आज एक लहराते जंगल का स्वरूप ले चुके हैं।

सहायक अध्यापक के पद से शिक्षा विभाग में अपनी सेवायें शुरू करने वाले सोवेन्द्र सिंह की पहली नियुक्ति उत्तरकाशी जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्र जखोल के स्कूल में हुई। वह बताते हैं कि शिक्षण कार्य के अलावा प्रकृति से उनका लगाव हमेशा उन्हें पर्यावरण को बचाने के कुछ करने के लिए प्रेरित करता रहा। 1996 में नौगांव विकासखंड के वर्नीगाड़ राजकीय इंटर काॅलेज में नियुक्ति के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य के बाद मिलने वाले समय का सदुप्रयोग करने की ठानी और स्कूल परिसर के बाहर करीब बंजर पड़ी जमीन को उन्होंने समतल बनाना शुरू किया। लगन और अपनी मेहनत के बल पर सोवेन्द्र सिंह ने एक छोटी-सी रंग बिरंगे फूलों की फुलवारी तैयार की जो सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई।

पर्यावरण में विशेष रुचि होने के चलते सोबेन्द्र सिंह ने खाली समय में इस जमीन पर पौधे रोपने शुरू किये। प्रकृति के संरक्षण के इस कार्य में जागरूकता की ऐसी अलख जगी कि स्कूल के छात्रों के साथ ग्रामीण भी उनके सहयोग के लिए आ खड़े हुए। करीब 130 प्रजातियों के विभिन्न पौधे जिनमें देवदार, चीड़ सहित आड़ू, सेब, नाशपाती, अमरूद आदि फलों के पौधे आज वृक्ष का रूप ले चुके हैं और यह क्षेत्र एक हराभरा जंगल बन चुका है। क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को यह हरियाली से भरपूर यह जंगल अपनी ओर आकर्षित करता है।

सोवेन्द्र सिंह ने क्षेत्र के सिगुड़ी गांव अन्तर्गत खाला क्षेत्र में भी करीब 50 नाली बंजर जमीन पर भी पौधे रोपकर इस जमीन को भी हराभरा बनाने का काम किया। आज यहां भी घना जंगल सोवेन्द्र सिंह गुरूजी के हौसले और जजबे का साक्षी बनकर लहरा रहा है।

सोवेन्द्र सिंह समय मिलने पर लोगों को पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूक करते रहते हैं। हरेला पर्व, हिमालय बचाओ पर्व, साक्षरता दिवस, रक्तदान दिवसय जैसे मौकों पर वह स्कूली छात्रों की रैली के माध्यम से हरियाली को बचाने की मुहिम को जीवित रखने का प्रयास करते रहते हैं।

मिल चुके हैं कई सम्मान:

शिक्षा के क्षेत्र के साथ पर्यावरण संरक्षण के बेहतरीन कार्य के लिए सोवेन्द्र सिंह को कई 2009 में शैलेश मटियानी सम्मान से नवाजा जा चुका है। कई राज्य स्तरीय सम्मान मिलने के साथ ही उन्हें विशिष्ट उपलब्धियों के लिए रोटरी इंटरनेशनल, राज्य स्तरीय साक्षरता सम्मान भी मिल चुका है।

Key Words : Uttarakhand, Uttarkashi, Teacher, jangle in Warnigadh, Jajba

 

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