Home संस्कृति एवं संभ्यता अनदेखी- कोई नहीं दून के प्राचीन तीर्थ स्थल गौतमकुण्ड की सुध लेने...

अनदेखी- कोई नहीं दून के प्राचीन तीर्थ स्थल गौतमकुण्ड की सुध लेने वाला !

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संजीव सुन्दरियाल/ देहरादून

उत्तराखंड को देवभूमि कहे जाने की बात किसी से छुपी नहीं है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले लोग भी जब कभी वापस अपने गांव या शहर आते हैं तो वह अपनी संस्कृति और परंपराओं का निर्वहन करते हुए अपने अराध्य के दर्शन कर मनोकामनायें और आशीर्वाद लेते हैं। सूबे की सरकारें धर्म और संस्कृति के संरक्षण की बात अपने एजेंडे में प्रमुखता के साथ रखकर लोगों की भावनाओं के एवेज में वोट बटोरने के काम को बखूबी अंजाम देकर इतिश्री कर लेती हैं। यही कारण है कि आर्थिकी के लिहाज से तकरीबन पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर इस राज्य के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व के धार्मिक स्थल बदहाल होते जा रहे हैं। पूजा अर्चना करने वाले पंडे भी सरकार और विभाग की चैखट पर गुहार लगाकर थक चुके हैं। डीबीएल संवाददाता संजीव सुन्दरियाल ने प्रदेश की राजधानी देहरादून के चन्द्रबनी स्थित बेहद प्राचीन तीर्थ स्थल गौतम कुण्ड पहुंचकर मंदिर के महंत हेमराज जी महाराज से इस स्थल के बारे में जो जानकारी हासिल की वह वास्तव में देवभूमि की गरिमा के लिहाज से संरक्षित की जाने वाली धरोहर है। आपकी जानकारी के लिए प्रस्तुत है इस बेशकीमती धरोहर पर यह लेख -ः

देहरादून के चन्द्रबनी में वृक्षों की हरियाली के बीच गौतम कुण्ड एक ऐतिहासिक धरोहर है। कहा जाता है कि इस स्थान पर ऋषि गौतम का आश्रम था। गौतम ऋषि ने इस स्थान पर अपनी पत्नी अहिल्या और पुत्री अंजली के साथ तपस्या की थी। तपस्या के प्रतिफल स्वरूप मां गंगा इस स्थान पर प्रकट हुईं थीं और इस स्थल का नाम गौतम कुण्ड कहलाया।

यहां पर हर साल बैशाखी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है। यहां बाबा गोरखनाथ एवं हनुमान जी की बाल्यावस्था की मूर्तियांे के दर्शन किये जा सकते हंै। इसके अलावा मां गंगा, संतोषी माता और माता अंजली का मंदिर भी यहां मौजूद है। मान्यता है कि हनुमान जी तीन माह में एक बार यहां आते हैं। पूर्णमासी के अवसर को लेकर भी कई तरह की आस्था यहां से जुड़ी हैं। स्थानीय लोग सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण एवं अन्य धार्मिक अवसरों पर इस स्थल पर पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं। मगर मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग एवं मंदिर के हालातों को लेकर वह सरकार और विभाग की इस ओर अनदेखी से आहत हैं।

मंदिर प्रांगण के निकट गंगा उद्धार सेवा समिति का भवन है जो मंदिर की तरह ही जीर्णक्षीर्ण हालात में अपने अस्तित्व से जूझता नजर आता है। प्रदेश का पर्यटन विभाग समय रहते इस धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल की दशा सुधारने के लिए जाग जाये तो निश्चित तौर पर यह स्थान देहरादून आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार आस्था का केंद्र साबित हो सकता है।

कैसे पहुंचे -ः

गौतम कुण्ड चन्द्रबनी देहरादून दिल्ली जाने वाले मार्ग पर घंटाघर से करीब 09 किमी एवं आईएसबीटी से डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित है। स्वयं के वाहन या स्थानीय यातायात के साधनों बस, विक्रम, टैंपो आदि से यहां पहुंचा जा सकता है।

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