ग्लूकोमा बीमारी से बचाव के लिए करायें समय पर जांच और उपचार : डॉ0 मानसी
विवेकानंद नेत्रालय हॉस्पिटल की ओर से विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के मौके पर ग्लूकोमा बीमारी से बचाव के लिए निकाली गई जागरूकता रैली, 160 लोगों ने कराई ग्लूकोमा स्क्रीनिंग

डीबीएल संवाददाता / देहरादून।
ग्लूकोमा से खोई हुई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती, मगर समय पर जांच और उपचार से आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है। यह बात विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के मौके पर विवेकानंद नेत्रालय हॉस्पिटल देहरादून की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मानसी पोखरियाल ने कही। इस दौरान रैली निकालकर ग्लूकोमा बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जागरूकता का संदेश भी दिया गया।
शनिवार को विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के मौके पर विवेकानंद नेत्रालय हॉस्पिटल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मानसी पोखरियाल ने कहा कि ग्लूकोमा (काला मोतिया) स्थायी अंधत्व के प्रमुख कारणों में से एक है। यह रोग धीरे-धीरे बिना लक्षण के आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे दृष्टि का मूक चोर कहा जाता है।
40 वर्ष से अधिक आयु, परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास, मधुमेह, अधिक चश्मे का नंबर या लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। समय पर आंखों की जांच से इसे पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है। इस दौरान विवेकानन्द नेत्रालय में 160 लोगों की ग्लूकोमा स्क्रीनिंग भी की गई ।



