उत्तराखंड

सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन को ध्यान रखकर हो चारधाम यात्रा का संचालन : अनूप नौटियाल

- एसडीसी फाउंडेशन ने चार धाम यात्रा 2025 पर रिपोर्ट “पाथवेज टू पिलग्रीमेजः डेटा इनसाइट्स, चैलेंजेस एंड ऑपर्च्युनिटीज जारी करी - प्रदेश सरकार से रिकॉर्ड संख्या के बजाय सुरक्षित, डेटा-आधारित और सतत यात्रा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की अपील

डीबीएल संवाददाता / देहरादून।


एसडीसी फाउंडेशन ने चार धाम यात्रा 2025 पर रिपोर्ट “पाथवेज टू पिलग्रीमेजः डेटा इनसाइट्स, चैलेंजेस एंड ऑपर्च्युनिटीज” रिपोर्ट जारी कर सरकार से रिकॉर्ड संख्या के बजाय सुरक्षित, डेटा-आधारित और सतत यात्रा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।

शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने चार धाम यात्रा 2025 पर एसडीसी फाउंडेशन की रिपोर्ट को साझा किया। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में विस्तृत विश्लेषण शामिल है। रिपोर्ट में 10 प्रमुख डेटा बिंदु प्रस्तुत किए गए हैं और दैनिक, साप्ताहिक एवं मासिक आंकड़ों के आधार पर यात्रा का विस्तारपूर्वक आंकलन किया गया है।

रिपोर्ट में कई चुनौतियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें पीक अवधि में अत्यधिक भीड़, आधारभूत संरचना पर दबाव, हवाई सुरक्षा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में समग्र सुरक्षा चिंताएं तथा यात्रा मार्गों पर पर्यावरणीय क्षरण शामिल हैं। 2025 की यात्रा के दौरान लगभग छह सप्ताह में कम से कम पांच हेलीकॉप्टर घटनाएं दर्ज की गईं हैं जो हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियों में उड़ान के जोखिम को दर्शाता है।

शून्य और कम श्रद्धालु वाले दिनों की स्थिति, जो मुख्य रूप से खराब मौसम, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण उत्पन्न हुई, ने तीर्थयात्रियों की संख्या को काफी प्रभावित किया है। यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह यात्रा स्थानीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख आधारशिला है, और लंबे समय तक कम संख्या स्थानीय समुदायों की आजीविका पर सीधा प्रभाव डालती है। यह स्थिति इस बात को रेखांकित करती है कि रिकॉर्ड संख्या के बजाय मजबूत और लचीले बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना आवश्यक है।

रिपोर्ट में चार धाम यात्रा के सुरक्षित और सतत प्रबंधन के लिए 10 प्रमुख सुझाव दिए गए हैं, जिनमें रिकॉर्ड संख्या से अधिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना, वहन क्षमता आधारित नियम लागू करना और एक व्यापक आपदा प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना शामिल है। अन्य सुझावों में शासन और जवाबदेही को मजबूत करना, स्थानीय समुदायों सहित हितधारकों की भागीदारी बढ़ाना, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ परिवहन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा डेटा-आधारित और तकनीक-सक्षम यात्रा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना शामिल है।

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