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…तो उत्तराखंड सैनिक कल्याण निदेशालय में मेडल्स का किया जा रहा गलत वर्गीकरण

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देहरादून। पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसिएशन (पीबीओआर) के केन्द्रीय अध्यक्ष पीटीआर शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा है कि उत्तराखंड सैनिक कल्याण निदेशालय द्वारा सैनिकों को दिए जाने वाले मैडलों का गलत वर्गीकरण किया हुआ है। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी के चलते मैडल के तहत दी जाने वाली धनराशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।

पीटीआर शमशेर सिंह बिष्ट ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को आधार बनाते हुए आरोप लगाया है कि सूबे के सैनिक कल्याण निदेशालय द्वारा सर्वोच्च युद्ध मैडल, उत्तम युद्ध सेवा मैडल और युद्ध सेवा मैडल जो गैर वीरता पुरस्कार है (नॉन गैलेन्ट्री) उनको वीरता पुरस्कार (गैलेन्ट्री) में दर्शाकर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को एक मुश्त क्रमशः सात लाख, पांच लाख, चार लाख और प्रत्येक वर्ष क्रमशः साठ हजार, पचास हजार, चालीस हजार की राशि का भुगतान दिया जा रहा है, जिससे सरकार की एक बहुत बड़ी राशि का दुरुपयोग हो रहा है।

उन्होंने कहा है कि सैनिक कल्याण निदेशालय आरटीआई के तहत प्राप्त सूचना में तीनों मैडलों को गैलेन्ट्री ऑवार्ड में दर्शाया जा रहा है। जिस पर बिष्ट ने रक्षा मंत्रालय, दिल्ली से उपरोक्त लिखित तीनों मैडलों के सम्बंध में सूचना मांगी। रक्षा मंत्रालय से प्राप्त सूचना के आधार पर ये तीनों मैडल गैलेन्ट्री ऑवार्ड की श्रेणी में नहीं आते है। ऐसे में सैनिक कल्याण निदेशालय द्वारा तीनों मैडलों का गलत वर्गीकरण किया गया है।

राज्य सूचना आयोग में अपील के दौरान बिष्ट ने रक्षा मंत्रालय से प्राप्त सूचना को प्रस्तुत किया। जिसके आधार पर राज्य सूचना आयुक्त राजेन्द्र कोटियाल ने प्रमुख सचिव गृह उत्तराखंड शासन को सेना के पदकों से सम्मानित व्यक्तियों को पुरस्कृत किए जाने के मामले में रक्षा मंत्रालय की गाइड लाइन का अनुसरण करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

Key Words : Uttarakhand, Dehradun, Medals, Sainik Welfare Directorate

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