तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस की 67वीं वर्षगांठ मनाई
तिब्बती समुदाय ने पंचेन लामा की सुरक्षित रिहाई की मांग दोहराई

डीबीएल संवाददाता / देहरादून।
तिब्बती समुदाय ने मंगलवार को तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस की 67वीं वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर तिब्बती समुदाय के लोगों ने परेड ग्राउंड से मार्च निकाला। जिसमें तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति और सांस्कृतिक पहचान पर बढ़ते दबाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया गया।
इस दौरान कहा गया कि तिब्बत में संचालित कथित “औपनिवेशिक बोर्डिंग स्कूलों” के कारण तिब्बती बच्चों को उनकी मातृभाषा, संस्कृति और धर्म से दूर किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि वह इस मुद्दे पर चीन पर दबाव बनाए। साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाते हुए पंचेन लामा की सुरक्षित रिहाई की मांग दोहराई गई और तिब्बती बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म की प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने की अपील की गई। साथ ही हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे बांध निर्माण और जल संसाधनों के दोहन को लेकर चेतावनी दी गई कि इसका प्रभाव भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की नदियों और पर्यावरण पर पड़ सकता है।इस अवसर पर भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर दिल्ली, देहरादून और लद्दाख में तिब्बती युवाओं ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने “तिब्बत की आजादी, भारत की सुरक्षा” के नारे लगाए और संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत मुद्दे पर विशेष दूत नियुक्त करने की मांग की।



