राजनीतिक

गैस संकट के लिए केंद्र सरकार की अदूरदर्शी नीतियां जिम्मेदार : डॉ. हरक सिंह रावत

डीबीएल संवाददाता ।

उत्तराखंड़ कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने देश में बढ़ते एलपीजी गैस और तेल संकट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि गैस संकट के लिए केंद्र सरकार की अदूरदर्शी नीतियां जिम्मेदार हैं और सरकार वास्तविक स्थिति को स्वीकार करने के बजाय जनता को गुमराह कर रही है।

डॉ. रावत ने कहा कि एक ओर सरकार गैस की कमी से इनकार कर रही है, वहीं दूसरी ओर गैस बुकिंग के लिए शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के बीच 25 और 45 दिन का अंतर निर्धारित किया गया है, जो संकट की गंभीरता को स्वयं उजागर करता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच इस प्रकार का भेदभाव समझ से परे है, जबकि गैस की आवश्यकता सभी को समान रूप से होती है।

डॉ. रावत ने यह भी आरोप लगाया कि गैस संकट के कारण सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन केवल बयानबाजी तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट केंद्र सरकार की विदेश और ऊर्जा नीति का परिणाम है। उनके अनुसार वर्ष 2014 में भारत लगभग 47 प्रतिशत गैस आयात करता था, जो अब बढ़कर करीब 66 प्रतिशत हो गया है। इसी तरह तेल आयात 83 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 88 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. रावत ने कहा कि यदि पूरे प्रदेश के सभी जिलों के आंकड़े सामने आ जाएं तो यह उत्तराखंड के इतिहास का बड़ा भ्रष्टाचार साबित हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।

प्रैसवार्ता में कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नेता विनोद चौहान और श्रम प्रकोष्ठ के दिनेश कौशल आदि मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button