उत्तराखंड

टिहरी बांध के निजीकरण का करेंगे विरोध : किशोर

देहरादून/डीबीएल संवाददाता। टिहरी बांध को निजी हाथों में देने की तैयारी चल रही है। यह आरोप प्रदेश सरकार पर उत्तराखण्ड कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने लगाया है। कहा कि केंद्र सरकार बीएसएनएल और ओएनजीसी की तरह अब टीएचडीसी को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे राज्य के जल संसाधनों की लूट करार देते हुए कहा कि निजीकरण के बाद रोजगार पर लगे सैकड़ों स्थानीय युवा बेरोजगार हो जाएंगे। इससे राज्य की जल संपदा की लूट का भी रास्ता खुल जाएगा।

उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में किशोर उपाध्याय ने इसे टिहरी बांध के लिए जल समाधि देने वाले 125 गांव की जनता के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि कोई भी परियोजना 25 साल के बाद राज्य सरकार में निहित हो जाती है। टिहरी बांध भी 2026 तक उत्तराखंड के स्वामित्व में आ जाता, लेकिन प्राइवेट इजेशन होने के बाद इस पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के साथ-साथ ये पूरे देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बताया। उन्होंने कहा कि अगर टिहरी बांध को निजी हाथों में सौंपा गया तब इसका सक्रियता के साथ विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे। टिहरी के नाम को मिटाने की साजिश राज्य और केंद्र सरकार कर रही है।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि टिहरी बांध का निर्माण 125 गांवों को डूबो कर किया गया इसमें उत्तराखंड की संपदाएं चली गईं। इसका निर्माण देश हित में किया गया न कि किसी व्यक्ति के हित में किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर टिहरी बांध निजी हाथों में जाएगा तो ये हम सभी के लिए चिंता का विषय होगा। इससे टीएचडीसी में काम कर रहे लोगों की छटनी का खतरा है जिसका विरोध किया जाएगा। इसके अलावा वहां पर देश की सीमा की सुरक्षा का सवाल है। उन्होंने कहा कि यह किसी भी लिहाज से देश, राज्य और टिहरी उत्तरकाशी के लोगों के हित में नहीं होगा।

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