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उत्तराखंड में बेईमान साबित हो रही तीर्थ व पर्यटन स्थलों से आयवर्द्धन की बात

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पंकज भार्गव

तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों के जरिए उत्तराखंड के धार्मिक व रमणीक स्थलों को स्थानीय लोगों की आय का साधन बनाने की बात सरकारें करती रही हैं, लेकिन परिणाम शून्य !! धार्मिक स्थलों को चकाचौंध करने के साथ यदि सरकार स्थानीय व्यापारियों से राय मशवरा कर इस दिशा में कार्य करे तो पर्यटन से रोजगार के स्वप्न को साकार किया जा सकता है।

उत्तराखंड में हेमकुण्ड साहेब के कपाट खुलने के बाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों की तादाद में सिख तीर्थयात्री यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं। उत्तराखंड राज्य बनने से लेकर आज तक तीर्थयात्रियों की आवक को स्थानीय लोगों की आय का जरिया बनाने व उन्हें हर संभव सुविधायें देने की बात सरकारें करती रही हैं लेकिन हेमकुण्ड यात्रा मार्ग पर सिख समुदाय की स्वयं की व्यवस्था से चलाये जा रहे लंगर और उनकी बढ़ती संख्या सरकार की बात को बईमान साबित करने वाली है।

मलेथा और देवप्रयाग के बीच सिख तीर्थयात्रियों के लिए ज्यादातर लंगर सेवा का संचालकों का कहना है कि तीर्थयात्रियों को निःशुल्क व बेहतर सुविधायें प्रदान करने के लिए सिख समुदाय के स्वयं के बूते पर सेवा कार्य किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से इस कार्य में किसी भी तरह का सहयोग नहीं दिया जाता है।

यह कहना भी गलत न होगा कि यात्रा काल के 4-5 महीने स्थानीय होटल, लाज, दुकान व ढाबा व्यवसायियों के लिए कमाई के होते हैं जिसके कारण वे यात्रियों को सुविधा के नाम पर मनमाने दाम वसूलने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते। यही वजह है कि तीर्थयात्री स्थानीय लोगों की सुविधाओं से परहेज कर स्वयं की सुविधाओं को ही प्राथमिकता देने लगे हैं। यात्रा मार्ग पर अक्सर यह भी देखने को मिलता है कि यात्री अपने वाहन में ही खानपान की सुविधाओं को साथ लेकर चलते हैं और मार्ग के किनारे ही वह अपना भोजन स्वयं के बूते तैयार कर लेते हैं।

स्थानीय व्यवसायियों की बात की जाए तो उनमें इस बात को लेकर चिंता भी है कि अब तीर्थयात्री उनकी सुविधाओं को मजबूरी मानकर ही उनके पास आते हैं। साथ ही आॅल वेदर रोड निर्माण को लेकर व्यवसायियों का यह तर्क भी है कि यात्रा मार्ग के सुगम होने से यात्रा का समय घट जाएगा जिसका सीधा असर उनके व्यवसाय पर पड़ेगा। वे कहते हैं कि हेलीकाप्टर सेवा के संचालन से भी उनका व्यवसाय काफी हद तक प्रभावित हुआ है। हाल ही में केदारनाथ में रोपवे निर्माण की बात भी चर्चाओं में है। यह रोपवे बनने 10 किमी की यात्रा कम हो जाएगी जिसका असर स्थानीय व्यापारियों की आमदनी पर पड़ना तय है।

2013 में प्रदेश में आई आपदा के बाद इस साल 2018 में हेमकुण्ड और चारधाम यात्रा पर रिकार्ड तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं। प्रदेश सरकार ने केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य पर पूरी ताकत झोंककर प्रचार-प्रसार किया है इस लिए यह प्रदेश सरकार की उपलब्धि में दर्ज भी होना चाहिए। इस दिशा में और बेहतरी के लिए अच्छा होता यदि सरकार की ओर से यात्रियों की सुविधाओं को भी दुरुस्त औरचाकचौबंद बनाने के लिए कुछ नये प्रयास भी किए जाते। देर से ही सही पर यदि समय रहते स्थानीय व्यवसायियों की राय लेकर रणनीति के तहत कार्य किया जाता है तो निश्चय ही पर्यटन से रोजगार के स्वप्न को साकार किया जा सकता है।

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