सीएम धामी ने सीमांत नेत्र चिकित्सालय की आधुनिक सुविधाओं को सराहा

डीबीएल संवाददाता।
सीमांत सेवा फाउंडेशन द्वारा संचालित डॉ. लीलाधर भट्ट सीमांत नेत्र चिकित्सालय, पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने चिकित्सालय की सेवाओं की सराहना करते हुए आधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, ऑप्टिकल बायोमीटर मशीन एवं आदि कैलाश क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा राहत कार्यों के लिए वाहन का लोकार्पण किया।
प्रदेश के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। चिकित्सालय में आधुनिक सुविधाओं के शुरू होने से सीमांत क्षेत्र के मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर नेत्र उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। राहत वाहन आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर स्थानीय निवासियों, तीर्थयात्रियों और सुरक्षा कर्मियों तक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाने के साथ ही आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी उपयोगी होगा।
इस अवसर पर पिथौरागढ़ की महापौर कल्पना देवलाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सीमांत सेवा फाउंडेशन के सचिव डॉ. सिद्धार्थ पटऩी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक पूरन जोशी और वरिष्ठ स्वयंसेवक धर्म सिंह रावत सहित गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में मददगार बनी सीमांत सेवा फाउंडेशन :
सीमांत सेवा फाउंडेशन स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सीमांत एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। फाउंडेशन के अंतर्गत पिथौरागढ़ में सीमांत नेत्र चिकित्सालय, हल्द्वानी के लामाचैड़ में सीमांत पॉलीक्लिनिक, मोबाइल मेडिकल यूनिट, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर तथा आदि कैलाश क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से पिथौरागढ़ के 104 दूरस्थ गांवों में मरीजों की जांच, आवश्यक दवाओं का वितरण और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक रेफरल सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त, बनबसा स्थित सीमांत पब्लिक स्कूल के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया जा रहा है।
डॉ. आदित्य अग्रवाल को किया सम्मानित:
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. आदित्य अग्रवाल को सम्मानित किया। डॉ. अग्रवाल दिल्ली से पिथौरागढ़ आकर पिछले तीन वर्षों से सीमांत क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। इस अवधि में उनके नेतृत्व में 500 से अधिक निःशुल्क नेत्र शिविरों के आयोजन, 10,000 से अधिक सर्जरी और एक लाख से अधिक मरीजों की जांच किए जाने की जानकारी दी गई। उनका यह योगदान दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा उपलब्ध कराने के प्रयासों को दर्शाता है।



