जिज्ञासु यात्री और प्रकृति के सच्चे साधक थे कमल जोशी: सीएस तिवारी
दून पुस्तकालय में कमल जोशी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री आवारगी का प्रदर्शन कर उन्हें याद किया

डीबीएल संवाददाता।
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से घुमक्कड़ और फोटो पत्रकार कमल जोशी के जीवन एवं व्यक्तित्व पर आधारित चर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्म आवारगी का प्रदर्शन कर उन्हें याद किया गया। इस अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्र शेखर तिवारी ने कहा कि कमल जोशी केवल एक उत्कृष्ट फोटोग्राफर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि, जिज्ञासु यात्री और प्रकृति के सच्चे साधक थे।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्र शेखर तिवारी ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कमल जोशी का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है तथा उनकी दृष्टि हमें प्रकृति, समाज और मनुष्य के प्रति अधिक संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती है।
फिल्म प्रदर्शन के उपरांत फिल्म के निर्देशक एवं निर्माता जयदेव भट्टाचार्य ने डॉक्यूमेंट्री के निर्माण की प्रक्रिया, शोध यात्रा तथा निर्माण के दौरान आए अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनका उद्देश्य कमल जोशी के व्यक्तित्व और कृतित्व के उन पक्षों को सामने लाना था, जो आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि संवेदनशील दृष्टि, प्रकृति-प्रेम और मानवीय मूल्यों का एक जीवंत दस्तावेज है।
वरिष्ठ साहित्यकार कवंलजीत कौर ने कमल जोशी की कविताओं की भावभूमि, उनकी भाषा और प्रकृति के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता पर विस्तार से प्रकाश डाला। निकोलस हॉफलैंड ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्आवारगीश् केवल एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि स्मृतियों, संवेदनाओं और रचनात्मक जीवन का सशक्त सिनेमाई दस्तावेज है।
कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता, फोटोग्राफी, सिनेमा, पर्यावरण तथा शिक्षा जगत से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक, बुद्धिजीवी, कलाकार, विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गीता गैरोला ने किया।



