बेटियों के सम्मान से जुड़ी ‘एक लड़की की कहानी’ के मंचन ने किया भावुक
दून पुस्तकालय में आयोजित ‘एक लड़की की कहानी़’ एवं कठपुतली की प्रस्तुतियों को सभी ने सराहा

डीबीएल संवाददाता।
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र एवं आसरा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित रंगकर्मी एवं लेखिका त्रिपुरारी शर्मा की स्मृति को समर्पित दो विशेष प्रस्तुतियों का आयोजन दून पुस्तकालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में एक ओर सामाजिक सरोकारों पर आधारित नाटक ‘एक लड़की की कहानी’ का प्रभावशाली मंचन हुआ, वहीं दूसरी ओर प्रसिद्ध लोक कलाकार रामलाल भट्ट ने राजस्थान की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली कला का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत कर दर्शकों को लोकसंस्कृति की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ त्रिपुरारी शर्मा के रंगमंच और बाल नाट्य के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान को स्मरण करते हुए किया गया। उनके रचनात्मक व्यक्तित्व और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टि को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनाएँ आज भी समानता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा देती हैं।
कार्यक्रम में बेटियों के सम्मान और समान अधिकारों को बयां करती ‘एक लड़की की कहानी’ का मंचन आसरा ट्रस्ट के बच्चों ने अत्यंत सहज, प्रभावशाली और संवेदनशील अभिनय के साथ किया। नाटक में जन्म से लेकर शिक्षा, खेल, स्वतंत्रता, निर्णय लेने के अधिकार और जीवन के अवसरों तक लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
वरिष्ठ लोक कलाकार रामलाल भट्ट ने राजस्थान की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली कला की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने अमर सिंह राठौड़ की प्रसिद्ध लोककथा से जुड़े पात्रों और विभिन्न पारंपरिक कठपुतलियों के माध्यम से इस प्राचीन लोककला की विशिष्टता, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा कलात्मक सौंदर्य का जीवंत परिचय कराया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. बीके जोशी ने की।
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने सभागार में उपस्थित लोगों का स्वागत किया।रंगकर्मी शिव सिंह नयाल ने त्रिपुरारी शर्मा के रंगकर्म, बाल नाट्य और सामाजिक सरोकारों पर आधारित सृजनात्मक योगदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पुस्तकालयाध्यक्ष डीके पाण्डे, जयभगवान गोयल, सुन्दर सिंह बिष्ट, त्रिपुरारी शर्मा के पुत्र कबीर, गजेन्द्र नौटियाल, देवेन्द्र कुमार, हर्ष मणि भट्ट, जगदीश सिंह महर, रंगकर्मी मदन डुकलान, जनकवि डॉ.अतुल शर्मा, जगदम्बा मैठाणी, कृष्णा नौटियाल, विजय भट्ट, मदन सिंह बिष्ट सहित अनेक साहित्यकार, लेखक, रंगकर्मी, कला प्रेमी, शिक्षाविद्, युवा, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।



