उत्तराखंड के शहरों को मिलेगा अर्बन चैलेंज फंड का लाभ

डीबीएल संवाददाता / देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों के समग्र विकास, आधुनिक आधारभूत ढांचे के निर्माण और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अर्बन चैलेंज फंड राज्य के लिए बड़ी सौगात साबित होने जा रही है।
राज्य सचिवालय में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें अपर सचिव आवास विनोद गिरी सहित आवास व शहरी विकास के उच्चाधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में शहरी विकास निदेशालय, उत्तराखंड शासन द्वारा योजना को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत राज्य के नगर निकाय परियोजनाएं तैयार कर केंद्र सरकार को भेजेंगे।
1 लाख करोड़ की राष्ट्रीय योजना, उत्तराखंड को विशेष लाभ :
भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना के तहत देशभर में 1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह योजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। योजना का उद्देश्य शहरों में बड़े निवेश को आकर्षित कर उन्हें विकास के नए केंद्रों के रूप में स्थापित करना है।
पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड को मिलेगा अतिरिक्त फायदा :
उत्तराखंड को इस योजना में विशेष लाभ इसलिए मिलेगा क्योंकि पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के सभी 108 नगर निकाय क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना के दायरे में आएंगे। इससे छोटे नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी बैंक ऋण लेकर बड़े विकास कार्य शुरू कर सकेंगी। जिन निकायों की वित्तीय क्षमता सीमित है, वे भी अब विकास योजनाओं को गति दे सकेंगे।
तीन क्षेत्रों में भेजे जाएंगे विकास प्रस्ताव :
योजना के अंतर्गत नगर निकायों से तीन प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाएं मांगी गई हैं। पहला, जल एवं स्वच्छता, जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट, वर्षा जल निकासी और कूड़ा निस्तारण शामिल हैं। दूसरा, रचनात्मक पुनर्विकास, जिसके तहत पुराने शहर क्षेत्रों, बाजारों, विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प किया जाएगा। तीसरा, सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स, जिसमें शहरों को पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने वाली योजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी।
राज्य के कई शहरों को मिलेगा लाभ :
राज्य सरकार द्वारा संभावित परियोजनाओं के उदाहरण भी तय किए गए हैं। ऋषिकेश, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुड़की, श्रीनगर, रामनगर और रुद्रपुर जैसे शहरों में औद्योगिक, तीर्थाटन पर्यटन और शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।
50 प्रतिशत मार्केट फाइनेंस अनिवार्य :
योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कुल परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मार्केट फाइनेंस यानी बैंक ऋण, बॉन्ड या पीपीपी मॉडल से जुटाना होगा। केंद्र सरकार 25 प्रतिशत और शेष 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार अथवा नगर निकाय वहन करेंगे। इससे नगर निकायों में वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदर्शन आधारित होगी फंडिंग :
फंड जारी करने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित रखी गई है। स्वीकृति के बाद केंद्रीय सहायता तीन किस्तों में मिलेगीकृपहली किस्त 30 प्रतिशत, दूसरी 50 प्रतिशत और अंतिम 20 प्रतिशत। आगे की किस्तों के लिए परियोजना की भौतिक प्रगति, जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक होगा।
सुधारों की शर्तें भी लागू योजना के साथ कई :
सुधारात्मक शर्तें भी जोड़ी गई हैं। नगर निकायों को संपत्ति कर सुधार, ऑडिटेड वित्तीय लेखे, डिजिटल नागरिक सेवाएं, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जलापूर्ति सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन जैसे कदम उठाने होंगे।



