दून के तुलाज़ इंस्टीट्यूट में छात्र संसद 2026 : युवाओं को संवाद के लिए मिला सशक्त मंच
रस्किन बॉन्ड फाउंडेशन के सहयोग से किया गया वॉयसेस ऑफ भारत का आयोजन

डीबीएल संवाददाता / देहरादून।
देहरादून स्थित तुलाज़ इंस्टीट्यूट में वॉयसेस ऑफ भारत विषय के अंतर्गत उत्तराखंड छात्र संसद 2026 का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 7,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में शासन, आध्यात्म, पत्रकारिता, कला और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने युवाओं से अपनी बात साझा की।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया, जिनमें आध्यात्मिक गुरु आचार्य बालकृष्ण, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ कल्बे रुशैद रिज़वी, वरिष्ठ पत्रकार आनंद नरसिम्हन, ऑल इंडिया एंटी-टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष एम.एस. बिट्टा, प्रोफेसर पंकज चौधरी, उद्यमी प्रफुल्ल बिल्लोर, सामाजिक उद्यमी आरुषि निशंक, छात्र संसद के संस्थापक अध्यक्ष अधिवक्ता कुनाल शर्मा, तुलाज़ ग्रुप के उपाध्यक्ष एवं छात्र संसद के राष्ट्रीय संयोजक रौनक जैन तथा सामाजिक कार्यकर्ता चारु प्रज्ञा शामिल रहे।
रौनक जैन और कुनाल शर्मा ने छात्र संसद की परिकल्पना और इसके व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डाला। रौनक जैन ने कहा, “छात्र संसद केवल एक सम्मेलन श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह एक सभ्यतागत पहल है। कुनाल शर्मा ने कहा, “छात्र संसद एक ही विश्वास पर आधारित है कि देश के हर छात्र को लोकतंत्र को केवल पढ़ने का नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में लाने का मंच मिलना चाहिए। कल्बे रुशैद रिज़वी और आचार्य बालकृष्ण ने भी अपने विचार साझा किए। आचार्य बालकृष्ण ने कहा, “भारत की ताकत उसके युवाओं के अनुशासन, संस्कार और ऊर्जा में निहित है। जब युवा राष्ट्र-निर्माण के लिए एकजुट होते हैं, तो देश का भविष्य सुरक्षित होता है।”
सम्मेलन में एम.एस. बिट्टा ने राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, कसी राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हमेशा सीमाओं पर नहीं होता, बल्कि भीतर की उदासीनता होती है। सत्र में बुआरी की सह-संस्थापक सचिव प्रेरणा का संबोधन और धीरेंद्र सिंह का सम्मान भी शामिल रहा।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रस्किन बॉन्ड सम्मान सत्र रहा, जिसमें धुरंधर फिल्म के अभिनेता मानव गोहिल, लेखक लक्ष्य महेश्वरी और फिल्म निर्माता एवं संगीतकार विशाल भारद्वाज ने भाग लिया। इस सत्र में कहानी कहने की कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक पहचान पर चर्चा हुई। विशाल भारद्वाज ने कहा, सिनेमा अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में समाज का दर्पण होता है। रस्किन बॉन्ड ने हिमालय को केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक जीवंत चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया।
रस्किन बॉन्ड फाउंडेशन के सह-संस्थापक सिद्धार्थ बॉन्ड ने कहा कि मैंने पूरे भारत में छात्र संसद का निर्माण करते हुए यात्रा की है, और बिना किसी संदेह के कह सकता हूं कि यह क्षण भारत में युवा नेतृत्व की नई परिभाषा तय करता है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर तुलाज़ ग्रुप के चेयरमैन सुनील कुमार जैन, सचिव संगीता जैन, तुलाज़ इंस्टीट्यूट की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिल्की जैन मारवाह, प्रतीक मारवाह, राधिका जैन तथा वाइस प्रेसिडेंट टेक्नोलॉजी राघव गर्ग सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।



