उत्तराखंड

विकास की नीतियों को प्रभावशाली बनाने को अर्थ एवं संख्या विभाग की कार्यशाला

दून विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ, जुलाई 2026 से जून 2027 तक चलेगा सर्वेक्षण

डीबीएल संवाददाता / देहरादून।

उत्तराखंड में सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत अर्थ एवं संख्या निदेशालय, उत्तराखण्ड की ओर से राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का शुभारंभ सोमवार को दून विश्वविद्यालय, मोथरोवाला में किया गया। यह कार्यशाला 13 से 15 जुलाई तक आयोजित की जा रही है। सर्वेक्षण का संचालन भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सामाजिक-आर्थिक सांख्यिकी प्रभाग के सहयोग से किया जा रहा है।

कार्यशाला का उद्घाटन निदेशक अर्थ एवं संख्या निदेशालय सुशील कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण का कार्य प्रदेश के सभी 13 जनपदों में विभागीय कार्मिकों द्वारा किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के माध्यम से राज्य में प्रवासन, मूल्यांकन, ऋण एवं निवेश से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे, जो राज्य एवं केंद्र सरकार की नीतियों और विकास योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

उप निदेशक डॉ. इला पंत बिष्ट ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान तीन अनुसूचियों के माध्यम से परिवारों से विस्तृत जानकारी संकलित की जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों के प्रवासन की स्थिति, पिछले 365 दिनों के दौरान प्राप्त धनराशि, रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों, कृषि परिवारों की आय, उत्पादन परिसंपत्तियों, कृषि पद्धतियों, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों तथा ऋणग्रस्तता से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।

इस अवसर पर एफओडी के केदार नाथ वर्मा, अपर निदेशक पंकज नैथानी, संयुक्त निदेशक डॉ. दिनेश चंद बड़ोनी, उप निदेशक ललित मोहन जोशी, निर्मल कुमार शाह, अपर सांख्यिकीय अधिकारी नरेन्द्र सिंह, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी नीरज प्रसाद सहित सभी जनपदों एवं मंडलों के अधिकारी तथा विकासखंडों के सहायक संख्याधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अर्थ एवं संख्याधिकारी अशोक कुमार ने किया।

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